Kavygatha Online Magazine 19/11/24
1. आशा "अंकनी", बैतूल
दर्द की इंतहा!
कैसे बयां करें दर्द और तकलीफें,
बताने के लिए शब्द नहीं जुबान पर,
दर्द का एहसास है दिल की गहराईयों में ,
और तकलीफों की चुभन आसमान पर।
कैसे बताएं कैसे समझाएं,अपना हाल,
पहरे लगे हैं, बिखरे हुए अरमान पर ,
पाने को तो मंजिलें है कई जिंदगी में,
पर अनदेखी पाबंदीयां हैं ऊंची उड़ान पर।
जिंदगी अपनी होकर भी अपनी नहीं,
किसी को तरस नहीं आता इस नादान पर,
संभाल कर खुद को कैसे संभल जाएं ,
भरोसा भी नहीं रहा अब इस बेईमान पर।
इंतहा हो गई है दर्द को सहने की,
दिखाई दे जाता है दर्द हर निशान पर,
गवाही देती है झुर्रियां बढ़ती उम्र की,
जिम्मेदारियां रूकती नहीं थकान पर।
शिकायतें जिंदगी से थमने लगी है अब,
उम्मीदें जिंदा है खुद के एहसान पर,
जो शब्द जुबान पर नहीं आ पाए,
वो कागज पर छप गए दिल के फरमान पर।
तकलीफों का अंदाज ए बयां ऐसा ही है,
खुदगर्जी का सुरूर छाया है इंसान पर,
खुद की कहानी के खुद ही दर्शक हैं हम ,
न पटकथा, न अंजाम,
बस अभिनय छाया है जहान पर।
2. प्रतिभा द्विवेदी, भोपाल
हवाओं में कैसा असर!
हवाओं में कैसा असर आज आया ?
कम्पित हुई लौ, दिया थरथराया ।
हमको न भय था किसी बात से
डरते नहीं थे गहन रात से
हृदय रक्त से जिसको सींचाथा हमने
व्यथित है हृदय उसके आघात से
अभ्यर्थनाओं ने क्या रंग पाया ?
कम्पित*****************
जहां सभ्यताओं ने जन्म पाया
कण-कण में जिसके ईश्वर समाया
फूलीं- फलीं संस्कृतियां जहां पर
उसी रज ने शिष्टत्व रज में मिलाया
निष्ठाओं ने रूप कैसा सजाया ?
कम्पित*******************
नदी,वृक्ष ,खग-मृग सभी से था नाता
जहां पाहनों को भी पूजा जाता
उनके ही वंशज भूले मनुजता
उन्हें स्वार्थसाधन ही अब सुहाता
लगी डीठकिसकी,किसका है साया ?
कम्पित********************
3. विजय कुमार पटैया, भैंसदेही
देश भक्ति गीत!
हरी भरी धरती है नीला आसमान,
सीमा प्रहरी हम खड़े हैं सीना तान।
बड़े-बड़े लड़ाकू योद्धा मार डाले हमने,
खड़े-खड़े ही गिर गए लगे धरा को चूमने।
धैर्य हमारी शक्ति है शहीद सम्मान,
सीमा प्रहरी हम खड़े हैं सीना तान।
गोलियों के आगे हमने बढ़ाया है सीना,
देश की खातिर हमें जहर पड़ा है पीना।
चाहे हिंदू , सिख या हो मुसलमान।
सीमा प्रहरी हम खड़े हैं सीना तान ।
हजारों लाखों दुश्मनों की फौज हैं खड़ी,
ऊंचे ऊंचे पर्वत है खाइयाँ बड़ी-बड़ी।
याद है हमें वह वीरों का बलिदान,
सीमा प्रहरी हम खड़े हैं सीना तान।
हरी भरी धरती है नीला आसमान,
सीमा प्रहरी हम खड़े हैं सीना तान।
4. Prahalad Parihar, Betul
My Daughter!
She came to our home,
And made it a heaven.
She walked with her little feet,
And her squealing made it seven.
She is the music of our life,
It's notes are odd and even.
Bloomed with heavenly fragrance,
She made our garden enliven.
She is our daughter, our angel,
Who created a stir in the woven.
मेरी बेटी!
कविता : प्रहलाद परिहार
वह हमारे घर आई ,
और उसने इसे स्वर्ग बना दिया ।
वह अपने नन्हें कदमों से यहां चली, और
उसकी किलकारियों ने इसे सुंदर बना दिया।
वह हमारे जीवन का संगीत है,
जिसके सुर सम और विषम हैं।
स्वर्गीय सुगंध से खिलते हुए,
उसने हमारे बगीचे को जीवंत बना दिया।
वह हमारी बेटी है, हमारी परी है,
जो जीवन के ठहराव में हलचल मचाए हुए है।




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