राम नवमी एवं हनुमान जयंती! Ramnavami and Hanuman Jayanti!
श्रीराम नवमी का उत्सव!
इस वर्ष राम नवमी १७ अप्रैल दिन बुधवार २०२४ को मनाई जा रही है । राम नवमी का उत्सव चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है जो अक्सर अप्रैल-मई में आता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के बालकाण्ड में स्वयं लिखा भी है कि उन्होंने श्रीरामचरित मानस की रचना का आरम्भ अयोध्यापुरी में विक्रम सम्वत् १६३१ (१५७४ ईस्वी) की रामनवमी, जो कि मंगलवार थी, को किया था। गोस्वामी जी ने श्रीरामचरितमानस में श्रीराम के जन्म का वर्णन कुछ इस प्रकार किया है-
भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी॥
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता॥
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रकट श्रीकंता॥
रामायण के अनुसार, राम, महाराज दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त थे। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग कर दिया था।
वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। माता सीता का अपहरण रावण द्वारा किया गया था, जिसकी खोज दौरान जटायु पक्षी जो बात करता था, जिसने उस समय रावण का प्रतिकार किया था , राम ने उनका पिता के समान अंतिम संस्कार किया था। आगे वे वानर द्वय हनुमान और सुग्रीव से मिले। सुग्रीव के साथ मैत्री की और उसके भाई बालि का वध कर सुग्रीव को वानरों और रीछों का राजा बनाया। हनुमान जी ने 100 योजन समुद्र लांघ कर लंका में माता सीता की खोज की। श्री राम ने रावण के भाई विभीषण को शरण दी थी। रावण अपने पुत्र मेघनाद, और भाई कुंभकर्ण सहित राम के द्वारा मार गया। उन्होंने रामेश्वरम् में शिवलिंग स्थापित किया जो की ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हैं। नवरात्रि में शक्ति की पूजा के उपरांत समुद्र पर पुल बनाया और रावण को विभीषण के द्वारा बताए रहस्य को जान कर मार गिराया। पुष्पक विमान के द्वारा माता सीता को लेकर वे शीघ्र भरत भैया के पास अयोध्या पहुंचे। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह रामायण संस्कृत भाषा का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने भी उनके जीवन पर केन्द्रित भक्तिभाव पूर्ण सुप्रसिद्ध महाकाव्य "रामचरितमानस" की रचना की थी, जो कि अवधी भाषा की श्रेष्ठ एवं वृहत्तम रचना भी है। यह भारतीय जन मानस में अत्यंत प्रसिद्ध है। इसे एक ग्रन्थ की संज्ञा दी गई है। दोनों के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में भी रामायण की रचनाएँ हुई हैं, जो बहुत प्रसिद्ध भी हैं। भारत में राम अत्यन्त पूजनीय हैं और आदर्श पुरुष हैं तथा विश्व के कई देशों में भी श्रीराम आदर्श के रूप में पूजे जाते हैं जैसे नेपाल, थाईलैण्ड, इण्डोनेशिया आदि ।
वैदिक धर्म के कई त्योहार, जैसे दशहरा, राम नवमी और दीपावली, श्रीराम की वन-कथा से जुड़े हुए हैं। रामायण भारतीयों के मन में बसा हुआ है, और आज भी उनके हृदयों में इसका भाव निहित है। भारत में किसी व्यक्ति को नमस्कार करने के लिए राम राम, जय सियाराम जैसे शब्दों को प्रयोग में लिया जाता है। ये भारतीय संस्कृति के आधार हैं।
हनुमान जन्मोत्सव !
इस वर्ष २०२४ हनुमान जयंती २३ अप्रैल दिन मंगलवार मनाया जायेगा। हनुमान जन्मोत्सव एक हिन्दू पर्व है। यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था ऐसा माना जाता है। हनुमान जी को कलयुग में सबसे प्रभावशाली देवताओं में से एक माना जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि विष्णु जी के राम अवतार के बाद रावण को दिव्य शक्ति प्रदान हो गई। जिससे रावण ने अपनी मोक्ष प्राप्ति हेतु शिवजी से वरदान माँगा कि उन्हें मोक्ष प्रदान करने हेतु कोई उपाय बताए। तब शिवजी ने राम के हाथों रावण को मोक्ष प्रदान करने के लिए लीला रची। उन्ही की लीला के अनुसार, उन्होंने हनुमान के रूप में जन्म लिया ताकि रावण को मोक्ष दिलवा सके। इस कार्य में रामजी का साथ देने हेतु स्वयं शिवजी के अवतार हनुमान जी आये थे, जो सदा के लिए अमर हो गए।
हनुमान जन्मोत्सव को लोग हनुमान मन्दिर में दर्शन हेतु जाते है। कुछ लोग व्रत भी धारण कर बड़ी उत्सुकता और ऊर्जा के साथ समर्पित होकर इनकी पूजा करते है। यह कहा जाता है कि वे बाल ब्रह्मचारी थे अतः उन्हें जनेऊ भी पहनाई जाती है। हनुमानजी की मूर्तियों पर सिन्दूर और चाँदी का वर्क चढ़ाने की परम्परा है। कहा जाता है राम की लम्बी आयु के लिए एक बार हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर चढ़ा लिया था और इसी कारण उन्हें और उनके भक्तो को सिन्दूर चढ़ाना बहुत अच्छा लगता है जिसे चोला कहते है। संध्या के समय दक्षिण मुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर मन्त्र जाप करने को अत्यन्त महत्त्व दिया जाता है। हनुमान जन्मोत्सव के समय रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड का पाठ करना भी हनुमानजी को प्रसन्न करता है। सभी मन्दिरो में इस दिन तुलसीदास कृत रामचरितमानस एवं हनुमान चालीसा का पाठ होता है। जगह जगह पर भण्डारे आयोजित किये जाते है। तमिलानाडु व केरल में हनुमान जयन्ती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है। वहीं कर्नाटक व आन्ध्र प्रदेश में चैत्र पूर्णिमा से लेकर वैशाख महीने के 10वें दिन तक यह त्योहार मनाया जाता है।


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